हाथ मे तलवार लेके घूम रहे थे…. कुमुद

राम राम गुरु जी 👏शिवार्चन मेरी अच्छे से हो रही थी, पर वहां नीली धोती, गमछा, सिर पर जटा,सुन्दर, चेहरे पर तेज, एक इंसान, हाथ में बडा तलवार लेकर इधरउधर घुम रहे थे ।चिंता में या गुस्से से पता नहीं।मैं उन्हेंप्रणाम किया, वो मुस्कुरा दिये।सब तरफ रौशनी निकलते छुपते।बडें से समुद्र साफ हल्की नीली जल।मैं फूल चढाने, मंत्र पर ध्यान दिया।आप वही कहीँ पर थे, अचानक एक बन्दर वहाँ कुछ खाने आया, तुरंत चला भी गया।नीली धोती वाला और भगवान श्री हरी, कृष्ण मोर पंख धारण किए सुनहरे से चमक मे दिखे।एक बडे ऊचें पहाड़ के नीचे चट्टान पर नीचे पैरों को हिला कर आपस मे हसँ कर बात कर रहे थे, पैरों के नीचे बहुत बडा गहराई लिए गड्ढा या खाई सा था।मैं अपने फूलों को देखा, अभी बहुत बचेहैं सोच कर मंत्र के साथ जल्दी करते गई,5मिनट पहले आखें खुल गई।धन्यवाद गुरु जी