आकाश में तैर रही थी….. जय श्री

राम राम गुरुजी, मैं जयश्री,आज चलतेही बाबा का ध्यानस्थ स्वरुप का दर्शन हुआ। पूरा शिखर के साथ नंदी के साथ केदारनाथ मंदिर का दर्शन हुआ।दिपक का दर्शन लेके मैं आगे चली।आप मंत्रोउच्चार कर रहे थे।बाजू को डमरू के साथ बड़ा त्रिशूलथा।मुझसे अच्छी पूजा संम्पन्न करवा ली।जब मैं केदारनाथ को ब्रह्मकमल अर्पण करने लगी,तब तरंगे उत्तपन्न होने लगी।जैसे पानी मे पत्थर डालते ही लहरें तैयार होते ,वैसेहि लहरें, तरंगे बाबा से निकलकर दूर तक जाती थी।बाबा को भोग चढ़ाया।गुरुजी को प्रणाम करके मैं खड़ी हो तो,मै कैलासपर्वत का दर्शन कर रही थी।साथ ही 2 ऋषि-मुनियों का दर्शन लिया।बाद में मानस सरोवर के पास थी।ब्रहदेवजी का दर्शन हुआ।बाबा हाथ में त्रिशूल लेकर बड़े पत्थर पर बैठे थे।मैने आशिर्वाद लिया तो बाबा बोले आज से तेरे हाथ को कोई भी छू नहीं सकता।बाद में मै आकाश में तैर रही थी।मैने नीचे देखा सभी लोग छोटी चीटियां जैसे दिख रहे थे।ऐसा बहुत देर तक देख रही थी।फिर गणेशजी के दर्शन हुए।फिर एक शिवलिंग का दर्शन हुआ।उसमे से सोने से भी ज्यादा चमकने वाले गोल्डन कारंजे निकल रही थी।बहुत देर तक देखने का मन कर रहा था।और एक बार गुरुजी का दर्शन लेकर चली गयी।गुरुजी आपकी, शिवप्रिया दीदी की कृपा से आज ये अवसर मिला।उसका पूरा मैने लाभ उठाया।बाबा का आशिर्वाद मिला।आपकी,दीदीकी साथ है,शिवबाबा का सिर पे हाथ है। मुझे घबराने की,डरने की क्या बात है।राम राम!!शिवशरनं!!!!गुरुचरनं